Apna Khata Rajasthan — जमाबंदी नकल, भू-नक्शा और नामांतरण ऑनलाइन देखें (2026)

Apna Khata (ई-धरती) राजस्थान के राजस्व मण्डल का आधिकारिक भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल है, जो apnakhata.rajasthan.gov.in पर चलता है। यहाँ बिना किसी login के जमाबंदी नकल, खसरा, खतौनी और नामांतरण की स्थिति देखी जा सकती है। सूचनार्थ नकल पूरी तरह मुफ्त है; ई-हस्ताक्षरित (e-signed) नकल का शुल्क ₹10 से शुरू होता है। ज़मीन का नक्शा इस पोर्टल पर नहीं, बल्कि अलग पोर्टल bhunaksha.rajasthan.gov.in पर मिलता है।

[CTA BUTTON HUB — बड़े tap-friendly बटन, mobile-first]

  • जमाबंदी नकल देखें — apnakhata.rajasthan.gov.in
  • भू-नक्शा देखें — bhunaksha.rajasthan.gov.in
  • नामांतरण के लिए आवेदन करें — [portal का mutation पेज — live link walkthrough में paste करें]
  • आवेदन की वर्तमान स्थिति — [tracking पेज link]
  • गिरदावरी विवरण — webgirdawari.rajasthan.gov.in
  • सहमति विभाजन आवेदन — [vibhajan पेज link]
  • सीमाज्ञान आवेदन / प्रतिक्रिया — [seema gyan पेज links]
  • Official ApnaKhata App (Android) — [Play Store link — package com.nic.apnakhata]
  • DLC रेट देखें — epanjiyan.rajasthan.gov.in
  • Bihar — biharbhumi.bihar.gov.in | UP — upbhulekh.gov.in | Haryana — jamabandi.nic.in

यह एक स्वतंत्र जानकारी वेबसाइट है; ऊपर दिए सभी बटन आपको सीधे सरकारी पोर्टल पर ले जाते हैं।


Apna Khata क्या है और इसे कौन चलाता है?

Apna Khata राजस्थान सरकार का भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल है, जिसे ई-धरती और भूलेख राजस्थान के नाम से भी जाना जाता है। इसे राजस्व मण्डल राजस्थान (Board of Revenue, टोडरमल मार्ग, सिविल लाइन्स, अजमेर) चलाता है, और तकनीकी ज़िम्मेदारी NIC (National Informatics Centre) की है।

यह पोर्टल Digital India के अंतर्गत DILRMP (Digital India Land Records Modernisation Programme) योजना का हिस्सा है। रिकॉर्ड जिन कानूनों के तहत रखे जाते हैं, वे हैं — Rajasthan Land Revenue Act, 1956 (भूमि-रिकॉर्ड और राजस्व व्यवस्था का आधार) और Rajasthan Tenancy Act, 1955 (खातेदारी अधिकारों का आधार)।

एक ज़रूरी बात URL को लेकर: पुराना पता apnakhata.raj.nic.in अप्रैल 2023 में बदलकर apnakhata.rajasthan.gov.in हो गया। पुराना link खोलने पर आप अपने-आप नए पोर्टल पर पहुँच जाते हैं, इसलिए bookmark पुराना हो तो भी घबराने की बात नहीं — बस आगे से नया पता ही याद रखें।

क्या Apna Khata पर Login करना पड़ता है? (सीधा जवाब: नहीं)

आम नागरिक के लिए Apna Khata पर कोई login या registration नहीं है। जमाबंदी नकल, खसरा-खतौनी, नामांतरण की स्थिति — यह सब बिना कोई account बनाए, बिना password के दिखता है।

पोर्टल पर जो दो login दिखते हैं, वे आपके लिए नहीं हैं:

  1. ई-मित्र login — ई-मित्र कियोस्क चलाने वाले operators के लिए, जो SSO ID से जुड़ा है। ये operators नागरिकों की ओर से शुल्क जमा करते हैं और आवेदन भरते हैं।
  2. Revenue Officer login — पटवारी और तहसीलदार जैसे राजस्व अधिकारियों के record-work के लिए।

सिर्फ एक स्थिति में आपको SSO ID की ज़रूरत पड़ सकती है — अगर आप ई-हस्ताक्षरित नकल का शुल्क खुद online भरना चाहें। इसके लिए sso.rajasthan.gov.in पर Jan Aadhaar से SSO ID बनती है। बाकी हर काम बिना login के होता है।

सावधानी: कोई app या website “Apna Khata login” या “registration” के नाम पर आपका मोबाइल नंबर, OTP या पैसे मांगे, तो वह सरकारी नहीं है। असली पोर्टल record देखने के लिए कभी login नहीं मांगता।

जमाबंदी नकल कैसे निकालें (Step by Step)

जमाबंदी ज़मीन का Record of Rights (RoR) है — इसमें मालिक का नाम, खाता संख्या, खसरा संख्या, रकबा (क्षेत्रफल) और भूमि का प्रकार दर्ज होता है। बैंक, कोर्ट और खरीद-बिक्री — हर जगह यही दस्तावेज़ सबसे पहले मांगा जाता है।

Steps से पहले यह तय कर लें कि आपको कौन-सी नकल चाहिए, क्योंकि पोर्टल दो तरह की नकल देता है:

  • सूचनार्थ नकल — मुफ्त, सिर्फ जानकारी के लिए। कोर्ट, बैंक या किसी सरकारी काम में मान्य नहीं।
  • ई-हस्ताक्षरित नकल — digitally signed, क़ानूनी रूप से मान्य। शुल्क ₹10 (पहले 10 खसरा तक), फिर ₹5 प्रति अगले 10 खसरा। बैंक लोन, कोर्ट केस, रजिस्ट्री से पहले verification और सरकारी सब्सिडी के लिए यही चाहिए।

अब नकल निकालने की पूरी प्रक्रिया:

  1. Browser में apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें।
  2. होमपेज पर “जमाबंदी नकल” पर क्लिक करें।
  3. अपना जिला चुनें।
  4. तहसील चुनें।
  5. जमाबंदी वर्ष चुनें — सामान्य स्थिति में “ऑनलाइन जमाबन्दी”; बहुत पुराने कागज़ी रिकॉर्ड के लिए “चौसाला पद्धति” का विकल्प है।
  6. गाँव के नाम का पहला अक्षर चुनें, फिर सूची में से अपना गाँव चुनें।
  7. आवेदक का नाम, शहर और पता भरें (यह सिर्फ record के लिए है)।
  8. खोज का आधार चुनें — खाता संख्या, खसरा संख्या, नाम, USN या GRN।
  9. विवरण भरकर “चयन करें” दबाएँ।
  10. सूचनार्थ या ई-हस्ताक्षरित — जो नकल चाहिए वह चुनें और PDF डाउनलोड या प्रिंट कर लें।

USN और GRN क्या हैं? ये किसी पुरानी नकल पर छपे digital ID होते हैं — खाता या खसरा नंबर याद न हो, पर पुरानी नकल पास हो, तो इन नंबरों से भी record निकल आता है।

[EEAT NOTE — walkthrough के बाद यहाँ अपना observed micro-tip डालें। उदाहरण का format: “नाम से खोजते समय हमने देखा कि…” — यह detail खुद portal use करके ही लिखें, किसी site से न लें।]

भू-नक्शा कैसे देखें (यह Apna Khata पर नहीं, अलग पोर्टल पर है)

ज़मीन का नक्शा Apna Khata पर नहीं मिलता — इसके लिए राजस्व मण्डल का ही अलग पोर्टल है: bhunaksha.rajasthan.gov.in। दोनों पोर्टल एक ही विभाग के हैं, पर सिस्टम अलग-अलग हैं, इसलिए “apna khata naksha” खोजने वाले अक्सर गलत जगह ढूँढते रह जाते हैं।

नक्शा देखने की प्रक्रिया:

  1. bhunaksha.rajasthan.gov.in खोलें।
  2. बाईं ओर District, Tehsil, RI, Halka, Village और Sheet No चुनें।
  3. Screen पर गाँव का नक्शा खुल जाएगा। अपने plot पर क्लिक करें, या ऊपर Plot No डालकर search करें।
  4. Plot Info panel में मालिक का नाम, खाता और रकबा दिखेगा।
  5. “Nakal” पर क्लिक करें, फिर “Show Report PDF” से नक्शे की copy डाउनलोड कर लें।

नक्शा देखना और PDF डाउनलोड करना मुफ्त है। प्रमाणित (certified) copy चाहिए तो ई-मित्र कियोस्क या तहसील कार्यालय से मिलती है, जिसका स्थानीय शुल्क लगता है।

अगर आपका गाँव या खसरा नक्शे में न दिखे, तो इसका मतलब अक्सर यह है कि उस क्षेत्र के पुराने cadastral नक्शों का digitization अभी बाकी है। ऐसे में तहसील के भू-अभिलेख कार्यालय से physical copy निकलवाई जा सकती है।

एक क़ानूनी बात साफ समझ लें: online नक्शा सिर्फ reference है। ज़मीन की क़ानूनी सीमा सीमाज्ञान (demarcation) की प्रक्रिया से तय होती है, जिसमें पटवारी मौके पर नाप करता है — इसकी पूरी प्रक्रिया नीचे [सीमाज्ञान section के anchor link] में दी है।

नामांतरण (Namantaran / दाखिल-खारिज) ऑनलाइन कैसे करें

नामांतरण का मतलब है सरकारी record में ज़मीन के मालिक का नाम बदलना — UP और Bihar में इसे दाखिल-खारिज कहते हैं। यहाँ एक बात शुरू में ही समझ लें, क्योंकि ज़्यादातर लोग यहीं उलझते हैं: रजिस्ट्री और नामांतरण दो अलग काम हैं। पहले Sub-Registrar Office (SRO) में रजिस्ट्री होती है, उसके बाद Apna Khata पर नामांतरण का आवेदन होता है। सिर्फ रजिस्ट्री कराने से जमाबंदी में नाम नहीं बदलता।

पोर्टल पर आवेदन के 8 आधिकारिक प्रकार हैं: बैंक से लोन लेने के लिए, रहनमुक्त (लोन चुकाने के बाद), विरासत, हकत्याग, उपहार (gift), नाबालिग से बालिग होने पर, भूमि आवंटन, और न्यायालय के आदेश से। ध्यान दें — इस सूची में “बिक्री” नाम का कोई विकल्प नहीं है; खरीद-बिक्री के मामले registered sale deed के आधार पर संबंधित category में जाते हैं। गलत category चुनना rejection की सबसे आम वजहों में से है।

ज़रूरी दस्तावेज़ (case के हिसाब से): registered sale deed, सभी पक्षों का आधार, पुरानी जमाबंदी नकल, विरासत के मामले में मृत्यु प्रमाण-पत्र और वारिस प्रमाण, gift या will के मामले में वह deed।

Upload की आधिकारिक शर्त: सारे दस्तावेज़ एक ही PDF में merge करने होते हैं, और हर page 150 KB से कम होना चाहिए — यह शर्त पूरी न होने पर आवेदन निरस्त हो सकता है। Online आवेदन शुल्क ₹20 है [walkthrough में payment screen पर current राशि confirm करके यहाँ “verified on (date)” जोड़ें — कुछ sites ₹30 लिखती हैं, इसलिए dated verification ज़रूरी है]

आवेदन की प्रक्रिया:

  1. apnakhata.rajasthan.gov.in पर “नामांतरण के लिये आवेदन करें” पर क्लिक करें।
  2. आवेदन का प्रकार (ऊपर बताए 8 में से) चुनकर “आगे चले” दबाएँ।
  3. जिला, तहसील और गाँव चुनें।
  4. खाता या खसरा संख्या से ज़मीन खोजें।
  5. पुराने और नए मालिक का विवरण भरें। Form में Roman (English) में टाइप करके Space दबाने पर text हिंदी में बदल जाता है।
  6. मोबाइल नंबर OTP से verify करें।
  7. Merged PDF upload करें।
  8. शुल्क का भुगतान करके आवेदन submit करें।
  9. Screen पर मिला टोकन नंबर लिखकर या screenshot लेकर सुरक्षित रखें — status इसी से track होता है, और online इसे दोबारा निकालने का कोई तरीका नहीं है।

समय कितना लगता है? सामान्यतः 30 से 90 दिन। यह पटवारी की जाँच और तहसीलदार की मंज़ूरी पर निर्भर करता है — कोई fix तारीख़ की guarantee नहीं होती, इसलिए 60 दिन बाद भी status “जाँच अधीन” दिखे तो घबराएँ नहीं, पर पटवारी से संपर्क ज़रूर कर लें।

आवेदन की स्थिति और Token Number कैसे Track करें

नामांतरण या किसी भी आवेदन की स्थिति देखने के लिए पोर्टल पर “आवेदन की वर्तमान स्थिति” विकल्प है। जिला, तहसील और गाँव चुनकर अपना टोकन नंबर डालें — status सामने आ जाता है। न कोई login, न कोई शुल्क।

Status में पाँच स्तर दिखते हैं, और हर स्तर पर आपको क्या करना चाहिए, यह जानना ज़रूरी है:

  1. प्राप्त — आवेदन system में पहुँच गया है। अभी कुछ करने की ज़रूरत नहीं; टोकन संभालकर रखें।
  2. जाँच अधीन — पटवारी record की जाँच कर रहा है। 30–45 दिन तक यही दिखना सामान्य है। इससे ज़्यादा समय हो जाए तो अपने पटवारी से एक बार मिल लें।
  3. दस्तावेज़ की कमी — कोई document अधूरा या अस्पष्ट है। पटवारी या तहसील कार्यालय से पता करें कि क्या कमी है, और मांगा गया दस्तावेज़ जल्द जमा करें — देरी से आवेदन निरस्त हो सकता है।
  4. स्वीकृत — नामांतरण मंज़ूर हो गया। कुछ दिनों में नई जमाबंदी में नाम update दिखने लगेगा; नकल निकालकर confirm कर लें।
  5. अस्वीकृत — आवेदन reject हुआ। कारण status में लिखा होता है। कमी सुधारकर नया आवेदन करें, या फैसले से असहमत हों तो तहसीलदार के यहाँ appeal का रास्ता खुला है।

टोकन नंबर खो गया हो तो online निकालने का कोई तरीका नहीं है। तहसील कार्यालय जाएँ — आवेदक का नाम, मोबाइल नंबर और आवेदन की अनुमानित तारीख़ बताने पर record से टोकन मिल जाता है।

सहमति विभाजन और सीमाज्ञान — कब और कैसे

ये दोनों सेवाएँ Apna Khata पोर्टल पर ही मिलती हैं, पर इनके बारे में सही जानकारी बहुत कम जगह लिखी है। दोनों का काम अलग है — विभाजन ज़मीन बाँटने के लिए, सीमाज्ञान सीमा नापने के लिए।

सहमति विभाजन (Consent Partition)

संयुक्त खाते की ज़मीन को सह-खातेदारों के बीच बाँटने की प्रक्रिया है — शर्त यह कि सभी सह-खातेदार राज़ी हों। एक भी सदस्य असहमत हो तो यह रास्ता बंद है; तब बँटवारा कोर्ट से ही होता है।

सामान्य दस्तावेज़ों के अलावा यहाँ तीन चीज़ें और चाहिए: सहमति इकरारनामा (जिस पर सभी सह-खातेदारों के हस्ताक्षर हों), नज़री नक्शा (कौन-सा हिस्सा किसे मिलेगा, यह दिखाता हुआ), और सभी पक्षों की ID। पुरानी जमाबंदी नकल साथ लगती है। Upload की शर्त वही है — सारे दस्तावेज़ एक PDF में, हर page 150 KB से कम।

सीमाज्ञान (Demarcation)

सीमाज्ञान तब कराया जाता है जब ज़मीन की असली सीमा को लेकर विवाद हो, पड़ोसी पर कब्ज़े का शक हो, बाड़ या दीवार बनानी हो, या बिक्री से पहले रकबा पक्का करना हो।

प्रक्रिया सीधी है: पोर्टल पर “सीमाज्ञान हेतु आवेदन” से आवेदन करें। इसके बाद पटवारी field visit करता है, मौके पर नाप होती है और boundary stones (पत्थर) लगाए जाते हैं। नाप की report पोर्टल के “सीमाज्ञान प्रतिक्रिया” section में दिखती है।

एक बात हमेशा याद रखें — क़ानूनी रूप से मान्य सीमा यही report तय करती है। भू-नक्शा पोर्टल पर दिखने वाला online नक्शा सिर्फ reference है; सीमा-विवाद में उसका हवाला काम नहीं आता, सीमाज्ञान report काम आती है।

गिरदावरी विवरण कैसे देखें (Samvat वर्ष का ध्यान रखें)

गिरदावरी पटवारी का फसल-निरीक्षण record है — किस खसरे पर किस मौसम में कौन-सी फसल बोई गई। किसान के लिए यह तीन कामों का proof है: बैंक से फसली लोन, फसल बीमा का claim, और सरकारी योजनाओं की eligibility।

गिरदावरी Apna Khata पर नहीं, अलग पोर्टल webgirdawari.rajasthan.gov.in पर दिखती है। देखने से पहले तीन फसल-चक्र समझ लें, क्योंकि पोर्टल season पूछता है:

  • रबी — अक्टूबर से मार्च (गेहूँ, सरसों, चना)
  • खरीफ — जून-जुलाई से अक्टूबर (बाजरा, मक्का, मूँग, ग्वार)
  • ज़ायद — मार्च से जून (तरबूज़, ककड़ी, सब्ज़ियाँ)

देखने की प्रक्रिया:

  1. webgirdawari.rajasthan.gov.in खोलें।
  2. वर्ष चुनें — ध्यान दें, यहाँ साल विक्रम संवत में माँगा जाता है, ईस्वी में नहीं। 2026 ईस्वी लगभग संवत 2082–2083 है।
  3. Season (रबी/खरीफ/ज़ायद) चुनें।
  4. जिला, तहसील, ILR, पटवार मंडल और गाँव चुनें।
  5. खाता संख्या डालें, captcha भरें और VERIFY दबाएँ।
  6. गिरदावरी विवरण खुल जाएगा; PDF डाउनलोड कर लें।
संवत ⇄ ईस्वी वर्ष कन्वर्टर

गिरदावरी पोर्टल पर वर्ष विक्रम संवत में माँगा जाता है। नीचे अपना साल डालें।

गिरदावरी में फसल गलत दर्ज हो — बोई कुछ, लिखी कुछ — तो पोर्टल से सुधार नहीं होता। पटवारी को written application दें, साथ में फसल का proof लगाएँ: बीज या खाद की रसीद, कुएँ/tubewell का बिजली bill, या पड़ोसी खातेदारों का statement। पटवारी न माने तो तहसीलदार के यहाँ appeal होती है। बीमा claim की season निकलने से पहले सुधार करा लेना ज़रूरी है, वरना claim अटक जाता है।

फीस — क्या मुफ्त है और कहाँ पैसा लगता है

सीधा हिसाब: देखना मुफ्त है, क़ानूनी copy पर शुल्क है।

सेवाशुल्क
सूचनार्थ जमाबंदी नकल देखना / downloadमुफ्त
खसरा-खतौनी की जानकारीमुफ्त
भू-नक्शा देखना और PDF downloadमुफ्त
आवेदन / नामांतरण status trackingमुफ्त
गिरदावरी विवरण देखनामुफ्त
ई-हस्ताक्षरित जमाबंदी नकल₹10 (पहले 10 खसरा), फिर ₹5 प्रति अगले 10 खसरा
नामांतरण का online आवेदन₹20 (verified on [तारीख़])
प्रमाणित copy (ई-मित्र / तहसील से)ई-मित्र rate chart के अनुसार

(शुल्क [तारीख़] को पोर्टल पर verify किए गए। ई-मित्र दरें emitra.rajasthan.gov.in पर हैं।)

एक ज़रूरी चेतावनी: गाँव-कस्बों में कुछ बिचौलिये “सरकारी fee” के नाम पर ₹200–500 तक माँग लेते हैं। ऊपर की table देखिए — जानकारी देखना पूरी तरह मुफ्त है, और ई-हस्ताक्षरित नकल भी ₹10–15 में निकल जाती है। किसी को पैसे देने से पहले एक बार खुद पोर्टल पर या इस page के बटन से देख लें।

Apna Khata App — असली App कौन सा है (और iPhone का सच)

Play Store पर सिर्फ एक official app है: ApnaKhata, जिसका developer NIC (National Informatics Centre) है और package name com.nic.apnakhata है। Install करने से पहले दो चीज़ें check करें — developer के नाम में NIC लिखा हो, और app के page पर सरकारी portal का ज़िक्र हो। बस यही दो-second की जाँच fake app से बचा लेती है।

App में वही सब मिलता है जो पोर्टल पर है — जमाबंदी नकल, नामांतरण आवेदन और उसकी tracking, भू-नक्शा, सीमाज्ञान और गिरदावरी — और यहाँ भी कोई registration नहीं माँगा जाता।

“Apna Khata” नाम से Play Store पर कई third-party apps भी मिलेंगी, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं है। इनमें से ज़्यादातर सिर्फ browser (WebView) में सरकारी site खोलती हैं और बीच में ads दिखाती हैं; कुछ बेवजह की permissions माँगती हैं। ऐसी किसी app में OTP या personal details कभी न डालें।

iPhone users के लिए साफ जवाब: iOS पर कोई official ApnaKhata app नहीं है। App Store पर इस नाम से जो मिले, वह सरकारी नहीं है। iPhone पर Safari या Chrome में apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें — पोर्टल mobile browser पर ठीक चलता है।

असली दिक्कतें और उनके Verified समाधान

पोर्टल slow है या खुल ही नहीं रहा। सुबह 10–12 और शाम 4–6 पोर्टल पर सबसे ज़्यादा load रहता है — इन घंटों से बचें। Browser का cache clear करें, दूसरा browser आज़माएँ, या WiFi की जगह mobile data पर खोलकर देखें।

OTP नहीं आ रहा। 10 मिनट तक रुकें — देरी आम है। बार-बार resend दबाने से number कुछ देर के लिए block हो सकता है। फिर भी न आए तो दूसरे मोबाइल नंबर से कोशिश करें।

जमाबंदी में नाम गलत लिखा है। पोर्टल से सीधे correction नहीं होता। इसका रास्ता शुद्धिपत्र (record correction) है — पटवारी को written application दें, साथ में आधार, पुरानी जमाबंदी और सही नाम का proof लगाएँ। पटवारी की report पर तहसीलदार की मंज़ूरी से record सुधरता है।

Token number खो गया। Online recovery का कोई विकल्प नहीं है। तहसील कार्यालय में नाम, मोबाइल नंबर और आवेदन की अनुमानित तारीख़ बताएँ — record से टोकन निकल आता है।

ई-हस्ताक्षरित नकल download नहीं हो रही। Payment हो चुका है तो घबराएँ नहीं — receipt पर लिखे token से पोर्टल के e-signed copy section में जाकर नकल दोबारा निकाली जा सकती है। कभी-कभी e-sign होने में 24 घंटे तक लगते हैं, इसलिए अगले दिन भी try करें।

गाँव list में दिख ही नहीं रहा। इसका मतलब अक्सर यह है कि उस गाँव के record का digitization अभी pending है। तहसील के भू-अभिलेख कार्यालय से confirm करें और वहीं से physical नकल निकलवाएँ।

10–15 साल पुरानी जमाबंदी नहीं मिल रही। पुराने साल के record अभी पूरी तरह online नहीं हैं। “चौसाला पद्धति” विकल्प में देखें; वहाँ भी न मिले तो तहसील के record room में application देकर physical copy मिलती है।

नामांतरण reject हो गया। Status में rejection का कारण लिखा होता है — सबसे पहले वह पढ़ें। ज़्यादातर मामलों में वजह अधूरे या अस्पष्ट documents, PDF की 150 KB शर्त पूरी न होना, या गलत आवेदन-category होती है। कमी सुधारकर नया आवेदन करें; फैसला गलत लगे तो तहसीलदार के यहाँ appeal करें।

[Walkthrough के दौरान मिली कोई नई दिक्कत यहाँ अपने शब्दों में जोड़ें — एक original problem-solution जो किसी site पर नहीं है, इस पूरे section से ज़्यादा कीमती है।]

ज़मीन खरीदने से पहले 6 रिकॉर्ड ज़रूर Check करें

राजस्थान में ज़मीन के ज़्यादातर fraud इन्हीं 6 जाँचों को छोड़ने से होते हैं। खरीदने का मन बना लिया हो, तो बयाना देने से पहले यह checklist पूरी करें:

  1. ई-हस्ताक्षरित जमाबंदी — Apna Khata से निकालें। Seller का नाम, खसरा नंबर और रकबा — तीनों वही हों जो seller बता रहा है। सूचनार्थ नकल से काम न चलाएँ; verification के लिए e-signed ही लें।
  2. भू-नक्शा — bhunaksha पोर्टल पर plot की boundary देखें और मौके पर seller जो ज़मीन दिखा रहा है, उससे मिलाएँ। दिखाई कहीं और, बेची कहीं और — यह पुराना तरीका आज भी चलता है।
  3. नामांतरण history — पिछले 25–30 साल की ownership chain देखें कि ज़मीन किस-किस के नाम से होती हुई seller तक पहुँची। बीच की कोई कड़ी गायब हो तो रुक जाएँ — वही कड़ी बाद में court case बनती है।
  4. Encumbrance Certificate (EC) — यह Apna Khata पर नहीं मिलता; Sub-Registrar Office (SRO) से निकलता है। इससे पता चलता है कि ज़मीन पर कोई loan, mortgage या attachment तो नहीं चल रहा।
  5. DLC रेट — epanjiyan.rajasthan.gov.in पर उस क्षेत्र की सरकारी दर देखें। Deal की कीमत DLC से बहुत नीचे हो तो stamp duty का झंझट और साथ में शक की वजह — दोनों समझें।
  6. Court case history — ecourts.gov.in पर seller के नाम से search करें कि ज़मीन को लेकर कोई मुकदमा तो नहीं चल रहा।

रजिस्ट्री, EC और DLC — ये तीनों काम SRO/पंजीयन विभाग के हैं, Apna Khata के नहीं; इसी तरह शहरी पट्टा UIT/नगर निकाय से बनता है। कौन-सा कागज़ किस दफ्तर से, यह साफ हो तो धक्के नहीं खाने पड़ते। और आखिरी बात — लाखों की deal में ₹5,000–10,000 की lawyer fee बचाने की चीज़ नहीं है; यही fee सबसे सस्ता बीमा है।

Apna Khata सिर्फ राजस्थान का है — Bihar, UP और Haryana वाले यहाँ जाएँ

“Apna Khata” नाम का land-record पोर्टल सिर्फ राजस्थान का है। दूसरे राज्यों के लोग भी यही नाम search करते हैं, इसलिए सीधे सही पते:

  • Bihar — “अपना खाता देखें” असल में Bihar Bhumi पोर्टल की भाषा है। Bihar के land records biharbhumi.bihar.gov.in पर हैं, और वहाँ Record of Rights को खतियान कहते हैं।
  • Uttar Pradesh — UP के record upbhulekh.gov.in पर मिलते हैं; वहाँ मुख्य दस्तावेज़ खतौनी कहलाता है।
  • Haryana — “Apna Khata Haryana” नाम का कोई पोर्टल है ही नहीं। Haryana की जमाबंदी jamabandi.nic.in पर देखी जाती है।

हर राज्य में दस्तावेज़ों के नाम, शुल्क और प्रक्रिया अलग हैं — जानकारी हमेशा अपने राज्य के official पोर्टल से ही लें।

क्या “Apna Khata Apna Rozgar” कोई सरकारी योजना है? (Fact-Check)

सीधा जवाब: [तारीख़] तक “Apna Khata Apna Rozgar” नाम की कोई official सरकारी योजना मौजूद नहीं है। न किसी सरकारी notification में, न किसी राज्य या केंद्र के portal पर, न PIB की किसी release में इस नाम की scheme मिलती है।

Internet पर इस नाम से “apply online” बताने वाले pages और videos ज़रूर घूम रहे हैं। यही pattern fake-yojana fraud का होता है — आकर्षक नाम, online form, और फिर registration fee या personal details की माँग। ऐसे किसी form में आधार नंबर, बैंक details या पैसे बिल्कुल न डालें।

कोई भी सरकारी योजना असली है या नहीं, यह जाँचने का भरोसेमंद तरीका: उस योजना का नाम + “site:gov.in” search करें, या pib.gov.in और अपने राज्य के official portal पर देखें। वहाँ न मिले तो योजना नहीं है। भविष्य में इस नाम की कोई official scheme आती है तो यह section update कर दिया जाएगा।

ज़रूरी शब्द 30 सेकंड में — खाता, खसरा, खतौनी, जमाबंदी

  • खसरा — ज़मीन के एक plot का नंबर। एक खसरा यानी नक्शे का एक टुकड़ा।
  • खाता — एक मालिक या परिवार का account नंबर। एक खाते में कई खसरे हो सकते हैं।
  • खतौनी — एक खातेदार के सभी खसरों की सूची।
  • जमाबंदी — पूरे गाँव की सभी खतौनियों का संकलन; इसी की copy को जमाबंदी नकल कहते हैं।

आसान भाषा में: खसरा plot है, खाता मालिक का account है, खतौनी उस account की passbook है, और जमाबंदी पूरे गाँव का register।

दो शब्द और, जो आगे काम आते हैं: P21 — नामांतरण मंज़ूर होने पर बनने वाली उसकी प्रतिलिपि, जो नामांतरण का proof है। शुद्धिपत्र — record में नाम या विवरण की गलती सुधारने की आधिकारिक प्रक्रिया, जो पटवारी की report और तहसीलदार की मंज़ूरी से होती है।

Helpline और आधिकारिक संपर्क

समस्या छोटी हो — नाम की गलती, गिरदावरी, नामांतरण की देरी — तो सबसे पहले अपने पटवारी से मिलें, फिर तहसील कार्यालय जाएँ। ज़मीन से जुड़े 90% काम इसी स्तर पर निपटते हैं, और record से जुड़ा असली अधिकार भी यहीं है। ऊपर के दफ्तर तभी काम आते हैं जब तहसील स्तर पर सुनवाई न हो।

राज्य स्तर के आधिकारिक संपर्क:

कार्यालयसंपर्क
राजस्व मण्डल राजस्थान, अजमेर0145-2627891
भू-प्रबंध आयुक्त, जयपुर0141-2373904
NIC तकनीकी सहायता (पोर्टल की दिक्कत)0141-2233725
Emailbor-rj@nic.in, scr-rj@nic.in
पताराजस्व मण्डल राजस्थान, टोडरमल मार्ग, सिविल लाइन्स, अजमेर

(सभी नंबर [तारीख़] को verify किए गए हैं। कोई नंबर बदला मिले तो हमें बताएँ।)

किस दिक्कत के लिए कहाँ call करें, यह भी साफ रहे: पोर्टल खुलने, PDF download या technical error की शिकायत NIC वाले नंबर पर; record, नामांतरण या फीस से जुड़े सवाल राजस्व मण्डल या अपनी तहसील में।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Apna Khata की official website क्या है?

आधिकारिक पता apnakhata.rajasthan.gov.in है। पुराना पता apnakhata.raj.nic.in अब अपने-आप नई site पर redirect हो जाता है, इसलिए पुराना bookmark भी काम करेगा।

क्या जमाबंदी नकल देखना free है?

सूचनार्थ नकल देखना और download करना पूरी तरह मुफ्त है। क़ानूनी रूप से मान्य ई-हस्ताक्षरित नकल का शुल्क ₹10 से शुरू होता है (पहले 10 खसरा तक)।

क्या सूचनार्थ नकल बैंक या कोर्ट में चलती है?

नहीं। सूचनार्थ नकल पर साफ लिखा होता है कि यह सिर्फ जानकारी के लिए है। बैंक लोन, कोर्ट केस और सरकारी कामों के लिए ई-हस्ताक्षरित नकल ही मान्य है।

नाम से जमाबंदी कैसे देखें?

नकल निकालते समय खोज के आधार में “नाम से” का विकल्प चुनें और खातेदार का नाम डालें। पूरी प्रक्रिया ऊपर [जमाबंदी नकल section के anchor link] में step by step दी है।

नामांतरण में कितना समय लगता है?

सामान्यतः 30 से 90 दिन। समय पटवारी की जाँच और तहसीलदार की मंज़ूरी पर निर्भर करता है, इसलिए कोई तय तारीख़ नहीं होती। Status “जाँच अधीन” में 45 दिन से ज़्यादा अटके तो पटवारी से संपर्क करें।

क्या Apna Khata का मोबाइल app है? iPhone पर भी?

Android पर NIC का official ApnaKhata app है (package com.nic.apnakhata)। iPhone के लिए कोई official app नहीं है — iOS पर browser में पोर्टल खोलें।

Apna Khata और Bhu Naksha में क्या फर्क है?

Apna Khata पर ज़मीन का लिखित record (जमाबंदी, खसरा, खतौनी) मिलता है, जबकि Bhu Naksha पर ज़मीन का नक्शा। दोनों राजस्व मण्डल के अलग-अलग पोर्टल हैं — record के लिए apnakhata, नक्शे के लिए bhunaksha।

Token number खो गया तो status कैसे देखें?

Token online दोबारा नहीं निकलता। तहसील कार्यालय में आवेदक का नाम, मोबाइल नंबर और आवेदन की अनुमानित तारीख़ बताएँ — record से token मिल जाता है।

क्या ज़मीन की photo या satellite नक्शा दिख सकता है?

Bhu Naksha पोर्टल पर plot की boundary वाला cadastral नक्शा दिखता है, satellite photo नहीं। ज़मीन की असली स्थिति देखनी हो तो नक्शे के खसरा नंबर को मौके पर मिलाना ही तरीका है।