Apna Khata Bihar: बिहार भूमि पर खाता-खेसरा और जमाबंदी पंजी ऑनलाइन देखें
बिहार में “Apna Khata” नाम का कोई अलग सरकारी पोर्टल नहीं है। बिहार की ज़मीन का रिकॉर्ड राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार के पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर मिलता है, और “अपना खाता देखना” असल में वहाँ जमाबंदी पंजी (Register-II) देखना है — जो बिना login और बिना शुल्क खुलती है।
यह नाम की उलझन इसलिए है क्योंकि Apna Khata राजस्थान के भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल का नाम है, जबकि बिहार में यह सिर्फ एक बटन का नाम रहा है — “अपना खाता देखें”। इसी वजह से “apna khata bihar” खोजने वाले अक्सर दूसरे राज्य की site पर पहुँच जाते हैं।
एक बात शुरू में तय कर लें: ऑनलाइन दिखने वाली जमाबंदी जानकारी के लिए है। सरकारी, बैंक या कोर्ट के काम के लिए डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति अलग पोर्टल bhuabhilekh.bihar.gov.in से निकलती है — इसका तरीका नीचे है।
बिहार भूमि के असली लिंक — कौन-सा काम कहाँ होता है
बिहार में एक ही विभाग के कई पोर्टल हैं, और हर काम के लिए अलग पता है। सभी पते .bihar.gov.in पर खत्म होते हैं।
| आपको क्या करना है | पोर्टल | Login चाहिए? |
|---|---|---|
| होम पेज, सभी सेवाओं की सूची | biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi | नहीं |
| जमाबंदी पंजी / अपना खाता देखना | जमाबंदी पंजी देखें | नहीं |
| डिजिटल हस्ताक्षरित खतियान, जमाबंदी, नक्शा | bhuabhilekh.bihar.gov.in | हाँ (Public Login) |
| दाखिल-खारिज और LPC का आवेदन | नागरिक लॉगिन | हाँ |
| दाखिल-खारिज की स्थिति | म्यूटेशन स्थिति | नहीं |
| जमाबंदी में गलती सुधार | परिमार्जन प्लस | हाँ |
| भू-लगान भुगतान | bhulagan.bihar.gov.in | नहीं |
| राजस्व नक्शा | bhunaksha.bihar.gov.in | नहीं |
“अपना खाता देखें” वाला पेज अब कहाँ है?
कई वेबसाइटें आज भी पुराने पते lrc.bih.nic.in को “official Apna Khata Bihar” बताती हैं। वहाँ बिहार का नक्शा खुलता था, जिले पर क्लिक करके अंचल और मौजा चुनते थे, फिर “खाता खोजें”।
आज विभाग के होम पेज पर यही काम “जमाबंदी पंजी देखें” के नाम से है, जो emutation.bihar.gov.in पर खुलता है। पुराना link खुले या न खुले, भरोसा इसी नए पेज पर करें — होम पेज की सेवा-सूची इसी को link करती है।
सावधान: “Bihar Apna Khata” नाम वाली हर website या app सरकारी नहीं है। सरकारी पता हमेशा .bihar.gov.in पर खत्म होता है। रिकॉर्ड देखने के लिए कोई fee या OTP नहीं लगता — कोई मांगे, तो वह विभाग नहीं है।
जमाबंदी पंजी में अपना खाता कैसे देखें
पेज का नाम “पंजी-II प्रतिवेदन” है। ऊपर के चार dropdown ज़रूरी हैं और इन्हें इसी क्रम में भरना होता है — ऊपर वाला चुने बिना नीचे वाला नहीं खुलता।
- ऊपर की table से “जमाबंदी पंजी देखें” पेज खोलें।
- जिला चुनें — सूची में बिहार के सभी 38 जिले हैं।
- अंचल चुनें। बिहार में तहसील नहीं, अंचल (Circle) होता है — कई guides यहाँ “tehsil” लिखकर उलझा देते हैं।
- हल्का चुनें, फिर मौजा (गाँव)।
- नीचे दिए खोज के तरीकों में से एक चुनें और विवरण भरें।
- सुरक्षा कोड भरकर खोजें; मिली सूची में अपनी जमाबंदी खोलें।
खोज के छह तरीके हैं। आपके पास कौन-सा कागज़ है, उसी से तय करें कि कौन-सा चुनना है:
| खोज का तरीका | कब चुनें |
|---|---|
| रैयत का नाम से खोजे | खाता नंबर नहीं पता, बस मालिक का नाम पता है |
| खाता नंबर से खोजे | पुरानी नकल या खतियान पर खाता नंबर लिखा है |
| प्लाट नंबर से खोजे | सिर्फ खेसरा / प्लॉट नंबर पता है |
| जमाबंदी संख्या से खोजे | लगान रसीद या पुरानी जमाबंदी पर संख्या लिखी है |
| कंप्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या से खोजे | Online निकाली गई पिछली प्रति पास है |
| समस्त पंजी-२ को नाम के अनुसार देखें | कुछ भी पता नहीं — पूरे मौजा की सूची देखनी है |
“भाग वर्तमान” और “पृष्ठ संख्या वर्तमान” वाले खाने जमाबंदी रजिस्टर के भाग और पन्ने के लिए हैं। ये पता न हों तो खाली छोड़ दें; ऊपर के किसी तरीके से रिकॉर्ड मिल जाता है।
बिहार के लोगों के लिए एक अलग सुविधा भी है: वही जमाबंदी भारत की सभी 22 भाषाओं में भी देखी जा सकती है — इसका विकल्प विभाग के होम पेज पर है। परिवार का कोई सदस्य दूसरे राज्य में रहता हो, तो काम आता है।
खाता या खेसरा नंबर नहीं पता? नाम से ऐसे खोजें
नाम से खोज सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है और सबसे ज़्यादा यहीं “कोई रिकॉर्ड नहीं मिला” आता है। वजह अक्सर नाम लिखने का तरीका होती है, रिकॉर्ड का गायब होना नहीं।
- पूरा नाम नहीं, नाम का पहला हिस्सा डालें। रिकॉर्ड में “राम प्रसाद सिंह” “रामप्रसाद” या “राम प्रसाद” — किसी भी तरह दर्ज हो सकता है।
- पिता, दादा या परदादा के नाम से खोजें। बिहार में बहुत-सी जमाबंदी अब भी पुरखों के नाम पर चल रही है, क्योंकि उनके बाद दाखिल-खारिज हुआ ही नहीं।
- नाम से न मिले, तो “समस्त पंजी-२ को नाम के अनुसार देखें” चुनें। पूरे मौजा की सूची खुलती है; उसमें परिवार का कोई जाना-पहचाना नाम ढूँढें।
- मौजा सही है, यह पक्का करें। एक ही नाम के दो गाँव अलग-अलग हल्का या अंचल में हो सकते हैं; पुरानी लगान रसीद पर लिखा मौजा और थाना नंबर मिलाएँ।
परिवार की ज़मीन पुरखे के नाम पर दिखे, तो वह ज़मीन “गायब” नहीं है — उसका दाखिल-खारिज बाकी है। आपके नाम पर लाने का रास्ता उत्तराधिकार (विरासत) के आधार पर दाखिल-खारिज है, जिसका आवेदन नागरिक लॉगिन से होता है।
बिहार के शब्द, जो राजस्थान-UP से अलग हैं
बिहार के रिकॉर्ड में कुछ शब्द ऐसे हैं जो दूसरे राज्यों की guides पढ़कर गलत समझ आते हैं:
- रैयत — जिसके नाम ज़मीन दर्ज है और जो लगान देता है; यानी खातेदार।
- खेसरा — बिहार में प्लॉट नंबर को खसरा नहीं, खेसरा कहते हैं।
- अंचल → हल्का → मौजा — बिहार की राजस्व इकाइयाँ, बड़े से छोटे क्रम में। मौजा की पहचान थाना नंबर से भी होती है।
- जमाबंदी पंजी (Register-II) — अंचल का वह रजिस्टर जिसमें आज कौन रैयत किस खेसरे का लगान देता है, यह दर्ज है। दाखिल-खारिज होते ही यह online अपने-आप update हो जाता है।
- खतियान — सर्वे के समय बना अधिकार-अभिलेख (कैडस्ट्रल या रिविजनल सर्वे)। यह उस समय की स्थिति बताता है, आज की नहीं।
खतियान और जमाबंदी में फर्क यहीं समझ लें: खतियान बताता है ज़मीन कहाँ से आई, जमाबंदी बताती है आज किसके नाम है। विवाद, बँटवारे या पुरानी हिस्सेदारी के सवाल पर खतियान देखा जाता है; लगान, लोन और खरीद-बिक्री से पहले मौजूदा जमाबंदी।
संयुक्त खाता: बिहार में सबसे आम उलझन
बिहार में ज़्यादातर खाते संयुक्त होते हैं — एक खाते पर कई भाई या पूरे परिवार के नाम, पर किसका कितना हिस्सा है, यह अक्सर लिखा नहीं होता। ज़मीन खरीदने वाला अगर सिर्फ बेचने वाले का नाम देखकर सौदा कर ले, तो बाकी हिस्सेदार बाद में दावा कर सकते हैं।
इसलिए जमाबंदी में सभी रैयतों के नाम पढ़ें, सिर्फ बेचने वाले का नहीं। बँटवारा हुआ है या नहीं, यह अंचल कार्यालय से पता करें।
2026 से कौन-सी कॉपी मान्य है: डिजिटल हस्ताक्षरित भू-अभिलेख
जमाबंदी पंजी पेज से निकला printout जानकारी के लिए है। सरकारी काम, बैंक या कोर्ट के लिए डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति चाहिए, जो भू-अभिलेख पोर्टल (bhuabhilekh.bihar.gov.in) से निकलती है। यहाँ खतियान, राजस्व नक्शे और जमाबंदी रजिस्टर जैसे पुराने रिकॉर्ड की scan की गई प्रतियाँ मिलती हैं।
2026 का बदलाव: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव के पत्र के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से अंचल और अभिलेखागार से कागज़ी नकल देना बंद है और online डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति ही मान्य है। जो दस्तावेज़ पोर्टल पर नहीं है, उसके लिए online अनुरोध करना होता है; प्रति तैयार होने पर पोर्टल पर डाल दी जाती है।
प्रति निकालने का तरीका:
- भू-अभिलेख पोर्टल पर Public Login चुनें। पहली बार हैं, तो मोबाइल नंबर से नया registration करें।

- दस्तावेज़ का प्रकार (जैसे खतियान), जिला, अंचल और मौजा चुनें; फिर खाता, खेसरा या नाम जैसी जानकारी से खोजें।

- Scan किया पन्ना पहले screen पर देखें, फिर जिन पन्नों की प्रति चाहिए उन्हें चुनें।

- शुल्क की राशि भुगतान से पहले screen पर दिखती है — वही अंतिम है, किसी बिचौलिये की बताई रकम नहीं।

- भुगतान के बाद हस्ताक्षरित प्रति download करें।

पोर्टल की अपनी शर्त ध्यान से पढ़ें: scan किया गया पन्ना ही मूल माना जाता है। उस पन्ने से टाइप करके डाली गई जानकारी सिर्फ खोजने में मदद के लिए है। टाइप की गई जानकारी और scan में फर्क दिखे, तो scan सही है।
आवेदन की स्थिति: दाखिल-खारिज, LPC और परिमार्जन
“Bihar Bhumi status” खोजने वाले ज़्यादातर लोग इन तीन में से किसी एक आवेदन की स्थिति देखना चाहते हैं। तीनों के status पेज बिना login खुलते हैं:
| किस आवेदन की स्थिति | कहाँ देखें |
|---|---|
| दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) | ऊपर की table में “म्यूटेशन स्थिति” |
| LPC (भूमि दखल कब्ज़ा प्रमाण पत्र) | एलपीसी आवेदन स्थिति |
| परिमार्जन प्लस (जमाबंदी सुधार) | परिमार्जन प्लस स्थिति |
आवेदन अंचलाधिकारी ने लौटा दिया हो
लौटाया गया आवेदन “अस्वीकृत” नहीं होता — उसमें कोई कमी बताई गई होती है। विभाग के होम पेज पर दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस, दोनों के लिए “अंचलाधिकारी द्वारा वापस किया गया” नाम से अलग status विकल्प हैं, जहाँ कमी का कारण लिखा मिलता है।
कमी पढ़ें, सुधारें और उसी आवेदन को दोबारा भेजें। देर करने पर लौटाया गया आवेदन रद्द भी हो सकता है, इसलिए status बीच-बीच में देखते रहें।
किसी और के दाखिल-खारिज पर आपत्ति हो — जैसे आपकी हिस्सेदारी वाली ज़मीन किसी एक के नाम हो रही हो — तो “दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति दर्ज करें” का विकल्प नागरिक लॉगिन के अंदर है। अंचलाधिकारी न्यायालय की कॉज़ लिस्ट (सुनवाई की तारीखें) भी होम पेज से देखी जा सकती है।
जमाबंदी में नाम या रकबा गलत है? परिमार्जन प्लस
कागज़ी रजिस्टर को computer में चढ़ाते समय बहुत-सी जमाबंदियों में नाम, पिता का नाम, खेसरा या रकबा गलत दर्ज हो गया। इसे ठीक करने का सरकारी रास्ता परिमार्जन प्लस है — जमाबंदी पंजी पेज पर भी सुधार के लिए यही रास्ता बताया गया है।
- आवेदन परिमार्जन प्लस पोर्टल पर मोबाइल नंबर से login करके होता है।
- जो जमाबंदी online दिख ही नहीं रही (छूट गई है), उसे जुड़वाने का आवेदन भी यहीं से होता है।
- साथ में वह कागज़ लगाएँ जिससे सही जानकारी साबित हो — खतियान, पुरानी लगान रसीद, केवाला या पुराना आदेश।
ध्यान दें: परिमार्जन गलती सुधारने के लिए है, मालिक बदलने के लिए नहीं। खरीद, विरासत या बँटवारे से नाम बदलवाना हो, तो रास्ता दाखिल-खारिज है।
Portal ही न चले — page error, payment अटकना, आवेदन submit न होना — तो वह शिकायत परिमार्जन प्लस के Raise a Ticket पर दर्ज होती है। अंचल कार्यालय के किसी कर्मचारी के काम से जुड़ी शिकायत के लिए होम पेज पर अलग जन शिकायत पोर्टल है।
पुराना खतियान कैथी लिपि में है
बिहार के बहुत-से पुराने खतियान और दस्तावेज़ कैथी लिपि में हैं, जिसे आज कम लोग पढ़ पाते हैं। विभाग इसके लिए नागरिक लॉगिन में कैथी दस्तावेज़ अनुवाद सेवा देता है, और होम पेज पर कैथी लिपि सीखने की पाठ्य पुस्तिका तथा राजस्व शब्दावली की PDF भी रखी है।
खाता देखने के बाद अक्सर ये चार काम पड़ते हैं
- भू-लगान भरना: भू-लगान पोर्टल पर जिला, अंचल, हल्का और मौजा चुनकर अपनी जमाबंदी खोलें, बकाया देखें और online भुगतान करें। रसीद संभालकर रखें — इस पर जमाबंदी संख्या और मौजा लिखा होता है, जो आगे हर खोज में काम आता है।
- नक्शा देखना: खेसरा कहाँ और किस आकार का है, यह भू-नक्शा पोर्टल पर दिखता है। प्रमाणित नक्शा भू-अभिलेख पोर्टल से निकलता है, और विभाग राजस्व मानचित्र घर तक भेजने की सेवा भी देता है।
- ज़मीन की मापी: सीमा पर विवाद हो, तो अंचल अमीन से मापी का आवेदन विभाग के ई-मापी पोर्टल (emapi.bihar.gov.in) से होता है।
- ज़मीन गिरवी तो नहीं: खरीदने से पहले बंधक भूमि खोज पर देख लें कि उस ज़मीन पर कोई बैंक loan दर्ज तो नहीं।
जमाबंदी में अपना मोबाइल और आधार जुड़वा लें, तो उस जमाबंदी में बदलाव होने पर SMS अलर्ट मिल सकता है। सीडिंग की स्थिति होम पेज पर देखी जा सकती है, और SMS अलर्ट चालू करने का विकल्प नागरिक लॉगिन में है। किसी की नज़र आपकी ज़मीन पर हो, तो यह अलर्ट सबसे सस्ती पहरेदारी है।
हेल्पलाइन और विभाग का पता
रिकॉर्ड से जुड़ा असली काम आपके अंचल कार्यालय में होता है — राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी (CO) के पास। Online में अटकें, तो पहले इनसे संपर्क करें:
| संपर्क | विवरण |
|---|---|
| टोल-फ्री हेल्पलाइन | 1800-345-6215 (सोमवार–शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6:00) |
| विभाग का पता | राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार, पुराना सचिवालय, बेली रोड, पटना – 800015 |
कुछ वेबसाइटों पर पिन कोड “8000015” छपा है — सही पिन 800015 है।
हेल्पलाइन पर दाखिल-खारिज, जमाबंदी और भूमि रिकॉर्ड की जानकारी, शिकायत दर्ज करने और आवेदन की स्थिति में मदद मिलती है। फैसला अंचल स्तर पर ही होता है, इसलिए आवेदन संख्या और जमाबंदी संख्या हाथ में रखकर बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिहार में अपना खाता देखने के लिए login करना पड़ता है?
नहीं। जमाबंदी पंजी, दाखिल-खारिज और LPC की स्थिति, भू-नक्शा और बंधक भूमि की खोज — ये सब बिना login खुलते हैं। Login सिर्फ आवेदन करने (दाखिल-खारिज, LPC, परिमार्जन, SMS अलर्ट) और डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति निकालने के लिए चाहिए।
Bihar Bhumi पोर्टल कौन चलाता है?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार। पोर्टल का तकनीकी काम NIC बिहार का है।
जमाबंदी पंजी का printout बैंक या कोर्ट में चलेगा?
नहीं। वह जानकारी के लिए है। सरकारी, बैंक या कोर्ट के काम के लिए भू-अभिलेख पोर्टल से निकली डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति लगती है।
दाखिल-खारिज हो गया, पर जमाबंदी में नाम कब दिखेगा?
दाखिल-खारिज मंज़ूर होने पर online जमाबंदी अपने-आप update होती है; इसके लिए अलग से दफ्तर नहीं जाना पड़ता। नाम न दिखे, तो पहले म्यूटेशन status में देखें कि आदेश सच में पारित हुआ है या नहीं।
क्या “Apna Khata” का कोई सरकारी app बिहार के लिए है?
विभाग के होम पेज की सेवा-सूची में किसी mobile app का link नहीं है। Play Store पर “Bihar Bhumi” या “Apna Khata” नाम के apps निजी developers के हो सकते हैं, इसलिए install से पहले developer का नाम जाँचें। सबसे भरोसेमंद रास्ता browser में .bihar.gov.in वाले पोर्टल खोलना है।
खतियान online कैसे निकालें?
खतियान जमाबंदी पंजी पेज पर नहीं मिलता। वह भू-अभिलेख पोर्टल पर Public Login करके, दस्तावेज़ का प्रकार “खतियान” चुनकर निकलता है।
